अमित शाह ने की अर्नब की गिरफ्तारी की निंदा, कहा – ‘कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने फिर किया लोकतंत्र को शर्मसार’

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी पर मुंबई पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की निंदा की और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को निशाना बनाने के लिए कांग्रेस की अगुवाई वाली एमवीए सरकार को ‘राज्य सत्ता के दुरुपयोग’ के लिए लताड़ लगाई।

बुधवार की तड़के सुबह फोर्स के अधिकारी अचानक एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के आवास पर पहुंचे और बिना किसी दस्तावेज के, अर्नब के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की। ये पूरा वाक्य रिपब्लिक के कैमरे कैद हो गया। वहीं मुंबई पुलिस ने उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के गिरफ्तार कर लिया और अपने साथ ले गई।

अमित शाह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर लोकतंत्र को शर्मसार किया। रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी के खिलाफ राज्य की सत्ता का दुरुपयोग व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। यह आपातकाल की याद दिलाता है।

बीजेपी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने खोला मोर्चा 

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट करते हुए कहा कि, ‘प्रत्येक व्यक्ति जो एक स्वतंत्र प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करता है वो महाराष्ट्र सरकार द्वारा अर्नब गोस्वामी के साथ किए जा रहे उत्पीड़न से उग्र है। यह सोनिया और राहुल गांधी द्वारा निर्देशित उन लोगों को चुप कराने का एक और उदाहरण है जो उनसे असहमत हैं। शर्मनाक!’

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, ‘भारत ने आपातकाल के लिए इंदिरा गांधी को माफ नहीं किया। भारत ने कभी भी प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करने के लिए राजीव गांधी को माफ नहीं किया। और अब एक बार फिर से राज्य की शक्ति का दुरुपयोग करके पत्रकारों पर हमला करने के लिए सोनिया-राहुल गांधी को देश माफ नहीं करेगा।’

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि महाराष्ट्र में मीडिया की स्वतंत्रता पर इस हमले की कड़ी निंदा करता हूं। ये फासीवादी कदम अघोषित आपातकाल का संकेत है। अर्नब गोस्वामी पर हमला सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है। हम सभी को भारत के लोकतंत्र पर हमले के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि मीडिया के जो लोग आज अर्नब के समर्थन में खड़े नहीं हैं, वो फासीवाद के समर्थन में हैं। आप अर्नब को पसंद नहीं करते हों, आप उन्हें स्वीकार नहीं करते हों, आप उसके अस्तित्व को तुच्छ समझते हों। लेकिन अगर आप चुप रहते हैं तो आप दमन का समर्थन करते हैं। कौन बोलेगा अगर अगला नंबर आपका हो।

इसी बीच बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने लिखा कि फासीवाद के संकेत। एक दुश्मन की पहचान (अर्नब गोस्वामी) एकीकरण का कारण है। इसका मतलब अभिव्यक्ति की आजादी मीडिया के दमन का कारण बन सकती है। लेकिन मानवाधिकारों के चैंपियन अब क्यों चुप हैं। हर किसी के मानवाधिकार मायने रखते हैं। भले ही आप सहमत न हों!

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