दार्जिलिंग में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने की शस्त्र पूजा, कहा- ‘एक इंच ज़मीन नहीं जाने देंगे’

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दशहरा के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के सुकना युद्ध स्मारक में शस्त्र पूजा की। इस दौरान उन्होंने चीन को दो टूक संदेश देते हुए कहा कि एक इंच ज़मीन नहीं जाने देंगे।

राजनाथ सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारतीय सेना के जवानों से भेंट करके मुझे हमेशा बेहद ख़ुशी होती है। उनका मनोबल बहुत ऊँचा रहा है, इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। उन्होंने आगे कहा कि भारत चाहता है कि तनाव ख़त्म हो और शांति स्थापित हो। मैं पूरी तरह आश्वस्त हूँ कि हमारी सेना भारत की एक इंच ज़मीन भी दूसरे के हाथ में नहीं जाने देगी।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज नेशनल हाईवे-310 के आंशिक वैकल्पिक मार्ग को, सिक्किम की जनता को समर्पित करते हुए मुझे बड़ी खुशी हो रही है। ‘गंगटोक’ से ‘नाथू-ला’ को जोड़ने वाला NH-310, पूर्वी सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की जीवन रेखा है।

उन्होंने कहा कि इस अवसर पर मैं, सिक्किम राज्य सरकार के योगदान की भी सराहना करना चाहता हूँ. राज्य के मुख्यमंत्री, उनके मंत्रीमंडल तथा अधिकारियों का योगदान प्रशंसनीय है. BRO को सड़क निर्माण के लिए शीघ्र भूमि अधिग्रहण, वन विभाग से मंजूरी और पत्थर खदान की स्थापना में आप लोगों का विशेष सहयोग मिला।

सुकना में एलएसी स्थिति की समीक्षा की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शानिवार को पूर्वी सेक्टर में सुकना स्थित 33वीं कोर के मुख्यालय में भारतीय सेना की तैयारियों की समीक्षा की।  यह कोर सिक्किम में चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर निगरानी रखती है।

रक्षा मंत्री दोपहर में दार्जिलिंग जिले में एक प्रमुख सैन्य अड्डे, जिसे ‘त्रिशक्ति’ कोर के रूप में जाना जाता है, पहुंचे थे। वह पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा गतिरोध के मद्देनजर सैन्य तैयारियों की समीक्षा के साथ-साथ सैनिकों के साथ दशहरा मनाने के लिए पश्चिम बंगाल और सिक्किम की दो दिवसीय यात्रा पर है। सिंह के साथ सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भी थे।

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच लगभग पांच महीने से सीमा पर गतिरोध चल रहा है जिससे उसके संबंधों में तनाव आया है।

दोनों पक्षों ने गतिरोध को दूर करने के लिए राजनयिक और सैन्य स्तर पर कई दौर की वार्ता की है। हालांकि, गतिरोध को समाप्त करने में कोई सफलता नहीं मिली है।

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