संजय भंडारी के खिलाफ ED ने दायर की चार्जशीट, रॉबर्ट वाड्रा का भी आया नाम

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राऊज़ एवेन्यू कोर्ट ने भगोड़े संजय भंडारी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर चार्जशीट का संज्ञान लिया है। ED ने भंडारी और उसके सह-षड्यंत्रकारियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 44 और 45 के तहत चार्जशीट दायर की थी। सूत्रों के मुताबिक, चार्जशीट में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा का भी नाम लिया गया है। कोर्ट ने ED से भंडारी को ब्रिटेन से भारत में लाने के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा है।

स्पेशल कोर्ट ने आरोपी को समन जारी किया है और ED को निर्देश दिया है कि वह यूके प्राधिकरणों के समक्ष संजय भंडारी के खिलाफ लंबित प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी लाए। एक केंद्रीय एजेंसी के अनुरोध के बाद भंडारी को लंदन में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें ब्रिटेन के एक कोर्ट ने जमानत दे दी और प्रत्यर्पण की कार्यवाही शुरू हो गई।

ED ने कहा है कि भंडारी ने टैक्स से बचने के लिए, अपने सहयोगियों की मदद से विदेशों में काला धन जमा किया और राष्ट्रीय खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया। जांच के दौरान, ED ने खुलासा किया कि संजय भंडारी यूएई में कई कंपनी का मालिक या उसका हिस्सा बना और पनामा स्थित इकाई में भी वित्तीय रूप से शामिल था। ED ने बताया कि भारत में आयकर अधिकारियों के सामने संजय भंडारी ने उन सभी विदेशी संपत्तियों और संस्थाओं का खुलासा नहीं किया था।

भंडारी पर क्या आरोप लगाया गया है?

हथियार डीलर भंडारी ने कथित तौर पर 10 मिलियन डॉलर में कंसल्टेंसी सेवाओं के लिए सैमसंग इंजीनियरिंग के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। सैमसंग इंजीनियरिंग ने अक्टूबर 2009 में 6,800 करोड़ रुपये का ONGC अनुबंध मिलने के बाद भंडारी की दुबई स्थित सेंटेक इंटरनेशनल FZC कंपनी को 2009 में 5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया। अगस्त 2009 में लगभग 5 मिलियन डॉलर के लिए र्टेक्स मैनेजमेंट होल्डिंग्स लिमिटेड के 100% शेयर खरीदने के बाद भंडारी ने एक संपत्ति (नंबर.12, ब्रायस्टोन स्क्वायर, लंदन) ली। यह संपत्ति बाद में 2011-12 में स्काईलाइट इनवेस्टमेंट FZE, दुबई को बेच दी गई थी।

स्काईलाइट इन्वेस्टमेंट को कथित तौर पर अचल संपत्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से अप्रैल 2009 में एक सीसी थम्पी द्वारा मंगाया गया था, लेकिन इस कंपनी में कोई व्यवसाय नहीं किया गया। यूपीए के दौर में हुई डील को लेकर CBI ने पहले ही दो एफआईआर दर्ज की थीं। भंडारी के खिलाफ CBI द्वारा दर्ज किया गया यह दूसरा मामला है।

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