हाथरसः CBI ने पीड़िता के भाई और पिता को फिर बुलाया, अलीगढ़ के डॉक्टरों से करेगी मुलाकात

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हाथरस मामले की जांच के दूसरे दिन, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार को पीड़िता के भाइयों और पिता को फिर से बुलाया है। CBI द्वारा चार भाइयों में से एक को मंगलवार को पूछताछ के लिए ले जाया गया था और सूत्रों के अनुसार, 14 सितंबर को हुई घटना को लेकर उसके बयान में कुछ विसंगतियां पाई गई थीं। CBI की टीम अपनी जांच के लिए अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज भी जा सकती है और उन डॉक्टरों से पूछताछ कर सकती है जिन्होंने पीड़िता का इलाज किया था।

CBI ने किया पीड़िता के अंतिम संस्कार स्थल का दौरा

मंगलवार को CBI की एक टीम घटनास्थल पर पहुंची जहां 30 सितंबर को कथित गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार किया गया था। एजेंसी ने जांच के लिए घटनास्थल से नमूने भी एकत्र किए। CBI के दौरे से पहले, उत्तर प्रदेश पुलिस ने क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मियों को तैनात किया था। इससे पहले दिन में, हाथरस पीड़िता का परिवार इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के समक्ष पेश होने के बाद बूलगढ़ी गांव में अपने घर लौट आया।

इस बीच, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को डांट लगाते हुए, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाथरस पीड़िता का देर रात दाह संस्कार करने को ‘मानवाधिकारों का उल्लंघन’ करार दिया जिसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। सोमवार की सुनवाई के बाद अपने आदेश में, उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पीड़िता के ‘चरित्र हत्या’ के खिलाफ चेतावनी दी और अधिकारियों, राजनीतिक दलों और मीडिया द्वारा संयम बरतने का आग्रह किया।

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उच्च न्यायालय ने लगाई वरिष्ठ अधिकारियों को फटकार

न्यायालय ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार और हाथरस के जिला मजिस्ट्रेट प्रवीण कुमार लक्ष्कर को फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ‘युवती के साथ बलात्कार नहीं होने’ की घोषणा करने के लिए फटकार भी लगाई। न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ ने अधिकारियों को बलात्कार की परिभाषा के बारे में याद दिलाया। अदालत ने राज्य सरकार को हाथरस जैसी स्थितियों में दाह संस्कार के लिए तौर-तरीके बताने का भी निर्देश दिया।

मामले में अगली सुनवाई 2 नवंबर को है जिसमें हाथरस के निलंबित पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर को भी अदालत में पेश होने के लिए कहा गया है। अदालत ने कहा कि अनुष्ठानों का पालन किए बिना दाह संस्कार करने से पीड़िता के साथ-साथ उसके परिवार और रिश्तेदारों के मानवाधिकारों का भी उल्लंघन हुआ है।

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