भारत में बैठे चीन और पाकिस्तान के दलालों को भारत की नागरिकता छिन लेनी चाहिए? : अर्नब गोस्वामी

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव अनुच्छेद 370 हटाने का नतीजा है।

फारूक अब्दुल्ला के इस बयान से देश की सियासत में उबाल आ गया है।  बीजेपी प्रवक्‍ता संबित पात्रा ने कहा कि ऐसा नहीं है कि केवल फारूक अब्दुल्ला ऐसा कहते हैं। यदि आप इतिहास में जाएंगे और राहुल गांधी के हाल फिलहाल के बयानों को सुनेंगे तो आप पाएंगे कि ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

पात्रा ने कहा कि यह वही राहुल गांधी हैं जिन्होंने एक हफ्ते पहले कहा था कि प्रधानमंत्री कायर हैं, प्रधानमंत्री छुपा हुआ है, डरा हुआ है। असल में पाकिस्तान और चीन को लेकर जिस प्रकार की नरमी और भारत को लेकर जिस प्रकार की बेशर्मी इनके मन में है, ये बातें अपने आप में बहुत सारे सवाल खड़े करती है। दूसरे देशों की तारीफ और अपने देश, प्रधानमंत्री और आर्मी के लिए इस प्रकार के वचन कहां तक सही है, यह सब आप समझते हैं। देश की संप्रभुता पर सवाल उठाना, देश की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करना क्या एक सांसद को शोभा देता है?

अर्नब की राय

कुछ लोग इस दुनिया में ऐसे होते हैं, जो स्वभाव से डरपोक होते हैं, लेकिन सपने चांद-सितारे तोड़ लाने के देखते हैं। ऐसे लोगों में एक का नाम नाम है फारूक अब्दुल्ला। फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि वो एक दिन चीन की मदद से अनुच्छेद 370 को वापस लेकर आएंगे। ये लोग आस्तीन के सांप हैं। इनकी गद्दार सोच को कुचलना जरूरी है। क्योंकि हम चाहे कुछ भी बर्दाश्त कर लें। राष्ट्रविरोधी बातें बर्दाश्त नहीं करेंगे। क्योंकि अगर हम चुप रहेंगे तो हजार राष्ट्रविरोधी उठ खड़े होंगे। आज मैं फारूक अब्दुल्ला से पूछना चाहता हूं कि आपको याद है गलवान में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे?

आपको याद है कैसे तिरंगे से लिपटकर हमारे शहीद अपने घरों की लौट रहे थे? फारूक अब्दुल्ला कुछ याद आया आपको। देशवासियों, जिन लोगों के कलेजे में देश के लिए साहस नहीं होता, ईमानदारी नहीं होती। उन लोगों को अपने बयानों पर शर्म भी नहीं आती। एक तरफ हमारी सेना दिन-रात सीमा पर लड़ रही है, दूसरी तरफ ये लोग दुश्मन की चरण-वंदना कर रहे हैं । देश को जवाब चाहिए। क्या ऐसे लोगों को भारत में रहने का हक है। बिल्कुल नहीं, जो भारत की खाएगा और चीन पाकिस्तान की गाएगा। उसका एक ही इलाज है। उनका पासपोर्ट छीन लो। उनकी नागरिकता वापस लो और चीन या पाकिस्तान की ओर भेज दो।

अब्दुल्ला परिवार बताए कि उन्हें कश्मीर में क्यों रहना चाहिए । इनके जाने से तो कश्मीर का भला ही हुआ । देशवासियों जो आदमी भारत में रहते हुए भारत के खिलाफ बोले, भारत का खाए और चीन की गाए, भारत का खाए और चीन के नमक का हक अदा करे। उसे तो चीन ही चले जाना चाहिए । फारूक अब्दुल्ला, आपके अंदर  हिम्मत है तो चीन चले जाओ। वहां जाकर बोलकर दिखाओ , हम भी देखें कि कितना दम है । अरे मैं पूछता हूं कि अगर आपको चीन का नाम जपने का इतना ही शौक है तो कभी चीन के उइगर मुसलमानों के बारे में क्यों नहीं बोलते। उइगर मुसलमानों का दर्द आपको नहीं दिखाई देता। 370 अब कभी वापस आने वाला नहीं है ।

ठीक उसी तरह जैसे कि आप कभी कश्मीर की सत्ता में वापस आने वाले नहीं हैं । कश्मीर ही नहीं पूरा देश चाहता है, जो देश के खिलाफ बात करे। उसका बहिष्कार करो, जो देश विरोधी बात करे, उसकी नागरिकता वापस लो, इन लोगों पर लगाम बहुत जरूरी है। क्योंकि ये देश में छिपे देश के दुश्मन हैं। इनके खिलाफ आज पूरा देश खड़ा है।

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