10 लाख नगद,15 लाख की FD..गाँव में जमीन व पक्का घर: मृतक पुजारी के परिवार को कपिल मिश्रा कर रहे मदद..

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राजस्थान के करौली स्थित सपोटरा के बूकना गाँव में पुजारी बाबूलाल वैष्णव की हत्या के बाद पूरे देश में पीड़ित परिजनों को न्याय दिलाने के लिए आक्रोश का माहौल बन रहा है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने मृत पुजारी के परिजनों से मिलकर उनके लिए वित्तीय सहायता सुनिश्चित की है। हालाँकि, राजस्थान की अशोक गहलोत की सरकार इस मामले में उदासीन बनी है और आलोचना का सामना कर रही है।

जिले के प्रभारी मंत्री अशोक चंदना और पूर्व मंत्री व क्षेत्रीय विधायक रमेश मीणा ने सोमवार (अक्टूबर 12, 2020) को गाँव का दौरा किया और ये राज्य सरकार की ओर से एक तरह से डैमेज कण्ट्रोल का प्रयास था। इन दोनों नेताओं ने राज्य सरकार की तरफ से पीड़ित परिजनों को सांत्वना दी और साथ ही सरकारी सहायता का चेक सौंपा। ये भी ध्यान देने वाली बात है कि इस घटना के बाद ये कॉन्ग्रेस नेताओं का गाँव में पहला दौरा है।

मृत पुजारी के पीड़ित परिवार को धनराशि, FD, घर और जमीन: कपिल मिश्रा का ऐलान

हमने इस पूरे मामले को समझने के लिए भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने बात की, जो राजस्थान में बूकना के इस पीड़ित परिवार से मिल कर आए हैं और उनकी सहायता के लिए धनराशि जुटाई है। उन्होंने बताया कि उन्हें खबरों और सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटना के बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने इस घटना का वायरल वीडियो देखा, जिसे उन्होंने काफी दर्दनाक करार दिया है। उन्होंने कहा कि ये वीडियो काफी पीड़ादायक था।

कपिल मिश्रा ने बताया कि इस वीडियो को देख कर उनके मन में आया कि उन्हें पीड़ित परिवार ने लिए कुछ न कुछ जरूर करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने दिवंगत पुजारी बाबूलाल वैष्णव के पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए एक कैम्पेन शुरू किया। कपिल मिश्रा के शब्दों में ही कहें तो इस पर उन्हें काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली। पहले ही दिन 10 लाख रुपए का फण्ड लोगों ने जुटा दिया, जबकि ये कैम्पेन शाम को शुरू किया गया था।

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Posted by Kapil Mishra on Monday, October 12, 2020

उन्होंने बताया कि उन्होंने 21 दिन में 21 लाख रुपए की सहायता राशि जुटाने का लक्ष्य तय किया था लेकिन मात्र 24 घंटे के अंदर ही इतनी धनराशि लोगों ने जुटा दी। खबर लिखे जाने तक 30 लाख रुपए इकट्ठे किए जा चुके हैं। इसके बाद कपिल मिश्रा पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे। उन्होंने बताया कि परिवार काफी गरीब है, उनके पास रहने के लिए घर तक नहीं है और धन तो है ही नहीं। उन्होंने कहा कि परिवार की स्थिति काफी पीड़ादायक है।

भाजपा नेता ने बताया कि दिवंगत पुजारी बाबूलाल वैष्णव का गरीब और असहाय परिवार घास-फूस की झोंपड़ी में रहने के लिए मजबूर है। वो अपने पीछे पत्नी के अलावा 6 बेटियों को भी छोड़ गए हैं, जिनमें से 4 की शादी हो चुकी है। उनके पास एक सक्रिय बैंक खाता तक नहीं था। एक बैंक खाता था, जो निष्क्रिय था। कपिल मिश्रा ने जानकारी दी कि वो दो तरीके से परिवार की सहायता करने जा रहे हैं। एक तो 25 लाख रुपए सीधे उनके बैंक अकाउंट में डाले जाएँगे। उन्होंने बताया

“हमने करौली स्टेट बैंक में दिवंगत पुजारी की पत्नी का बैंक खाता खुलवाया है। 15 लाख रुपए की सहायता राशि फिक्स्ड डिपॉजिट के माध्यम से उन्हें दी जाएगी। ये 10 वर्षों के लिए होगा। हर साल इसका इंटरेस्ट परिवार को मिलता रहेगा, जिससे उनका खर्च चलेगा। इससे रुपया भी बचा रहेगा और उनका खर्चा-पानी भी चलता रहेगा। इसके अलावा 10 लाख रुपए उन्हें तत्काल सहायता के रूप में दिए जाएँगे। इससे लगातार कुछ इनकम भी आ जाएगी, बैंक में सेविंग्स भी रहेंगी और अभी के खर्च के लिए भी धन होगा।”

25 लाख रुपए के अतिरिक्त जो भी धनराशि आई है या आगे आने वाली है, उसके लिए कपिल मिश्रा ने बताया कि अलग से योजना बनाई जा रही है और इस सम्बन्ध में उन्होंने ग्रामीणों से भी बातचीत की है। उन्होंने कहा कि पंचायत की मदद से गाँव में ही पीड़ित परिवार के लिए जमीन ली जाएगी और वहाँ उनके लिए एक पक्का घर बना कर दिया जाएगा। इसके लिए अभी भी विचार-विमर्श चल रहा है।

उन्होंने कहा कि 3-4 महीने में पीड़ित परिवार के लिए घर बनवा कर तैयार कर लिया जाएगा। कपिल मिश्रा ने बताया कि उनकी स्थानीय अधिकारियों से इस मामले में कोई बात नहीं हुई है लेकिन उन्हें पता लगा है कि रविवार तक बाबूलाल वैष्णव की मृत्यु के 3 दिन बीत जाने के बावजूद स्थानीय विधायक तक पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुँचा, मुख्यमंत्री या मंत्री तो भला दूर की बात है। उन्होंने कहा कि जनता के काफी दबाव के बाद सरकार ने मदद की घोषणा की है।

बता दें कि राजस्थान सरकार ने पीड़ित परिवार के लिए बतौर मुआवजा 10 लाख रुपए देने की घोषणा की थी। उन्होंने सरकारी सहायता की हिसाब से इस मुआवजे को काफी कम बताते हुए कहा कि 30 लाख रुपए की सहायता तो जनता ने ही कर दिया है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस मामले में न्याय सुनिश्चित करते हुए नहीं दिख रही है और इसे रफा-दफा करने में लगी है, ताकि इसकी चर्चा ही न हो।

कपिल मिश्रा का कहना है कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद सरकार के अधिकारियों और नेताओं को पीड़ित परिवार के साथ खड़ा हुआ दिखना चाहिए था लेकिन अब तक लग नहीं रहा कि ऐसा हुआ है। उन्होंने बताया कि परिवार को राजस्थान पुलिस-प्रशासन के काम करने के तरीके से संतुष्टि नहीं है और उन्होंने सीबीआई जाँच की माँग की है। बता दें कि इस हत्याकांड के कुछ आरोपित अभी भी फरार चल रहे हैं।

राजस्थान: करौली के बूकना में पुजारी बाबूलाल वैष्णव की हत्या: अपडेट्स

रविवार को अचानक से आरोपित परिवार की महिलाएँ उग्र हो गईं और उन्होंने पीड़ित पक्ष के घर जाकर जम कर हंगामा किया। आरोपितों की पत्नियों व बेटियों का कहना था कि पुजारी ने खुद को ही जला डाला और थानाधिकारी ने ‘सही बात कही’, इसीलिए उन्हें हटा दिया गया। एक महिला ने दावा किया कि पुजारी को बचाने में उसका हाथ भी झुलस गया था। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण चौधरी भी वहाँ पहुँचे और पीड़ितों से मुलाकात की।

इस दौरान वहाँ पहुँचे भाजपा नेता कपिल मिश्रा का भी स्थानीय लोगों और नेताओं ने स्वागत किया। वहीं पीड़ित पक्ष ने शिकायत की है कि उन्हें आरोपितों की तरफ से अभी भी धमकियाँ मिल रही हैं। मृतक की पत्नी ने अपनी जान को ख़तरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई है। सांसद डकटर किरोड़ीलाल मीणा ने भी अपने धरना प्रदर्शन में यही माँग रखी थी। फिर भी आरोपित पक्ष की महिलाओं ने जो हंगामा किया, उससे पीड़ित परिवार सहमा हुआ है।

वहीं मृत पुजारी की पत्नी विमला देवी व दो बेटियों की तबियत खराब होने के बाद पूरे परिवार का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। चिकित्सकों ने वहाँ पहुँच कर परिजनों का उपचार किया। न्याय और मुआवजे की माँग को लेकर परिवार ने भूखे-प्यासे धरना दिया था और प्रदर्शन किया था, जिसके बाद उनमें से कई की तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं हंगामा करने वाली महिलाओं को हिरासत में लिया गया।

इस मामले में मदद के लिए हाथ बढ़ रहे हैं और ‘विप्र सेना’ की ओर से पीड़ित परिवार को 51 हज़ार रुपए की सहायता दी गई। साथ ही ‘परशुराम सेना वाहिनी’ के महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी ने भी 21 हजार रुपए की सहायता प्रदान की। इससे पहले सांसद किरोड़ीलाल मीणा और मनोज राजौरिया की तरफ से भी एक-एक लाख रुपए की सहायता राशि दी गई थी। साथ ही ‘विप्र फाउंडेशन’ ने 2 लालः रुपए की सहायता दी।

वहीं अब इस मामले की गूँज जयपुर में भी सुनाई दे रही है, जहाँ ‘फाइट फॉर राइट (FIR)’ नमक संगठन ने इस घटना को लेकर राजस्थान की राजधानी में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। जब पुजारी ज़िंदा थे और उनके इलाज चल रहा था, तब भी इस संगठन के लोगों ने सवाई मानसिंह अस्पताल पहुँच कर सहायता की माँग उठाई थी। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने गाँव पहुँच कर पीड़ित परिवार का हालचाल जाना।

क्या है मामला?

बूकना के पुजारी की गुजर-बसर के लिए गाँव के ही लोगों ने कुछ जमीन मंदिर के नाम कर रखी थी। इसी जमीन से सटती हुई कुछ जमीन और है, जो कुछ समय पहले तक एक पहाड़ी जैसी थी। मंदिर के पुजारी को वह जमीन उपयोगी लगी तो उन्होंने उसे समतल करवा लिया और गाँव की पंचायत बुला कर यह जमीन भी मंदिर के नाम कराने की सहमति ले ली। गाँव की पंचायत ने एकमत हो कर यह जमीन मंदिर के नाम करवा देने की सहमति दे दी।

पंचायत में कैलाश मीणा के परिवार ने इस फैसले का विरोध किया, लेकिन पंचों ने पुजारी के पक्ष में फैसला दिया। सात अक्टूबर को कैलाश मीणा और उसके परिवार के कुछ लोग जब इस समतल की हुई जमीन पर कब्जा करने पहुँचे तो पुजारी ने इसका विरोध किया और कहा कि पंचायत जमीन मंदिर को दे चुकी है तो अब तुम कब्जा क्यों कर रहे हो। इस बात को लेकर दोनो के बीच विवाद हुआ और गर्मागर्मी में ही कैलाश मीणा और इसके साथियों ने बाबूलाल वैष्णव पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी।

पुजारी के परिवार वालों और गाँव वालो ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया, जहाँ से उन्हें जयपुर रेफर कर दिया गया और शुक्रवार यानी नौ अक्टूबर को उपचार के दौरान पुजारी की मौत हो गई। इस घटना के एक तथ्य में असमंजस है कि पुजारी ने स्वयं आत्मदाह किया अथवा कैलाश और उसके समर्थकों ने जलाया या कैलाश मीणा जो छप्पर बना रहे थे, बाबूलाल वैष्णव उसको आग लगाने गए और उसमें झुलस गए।

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