लालू-नीतीश से पहले सियासत में आने वाले रामविलास नहीं रहे, PM मोदी बोले- मैंने अपना दोस्त खो दिया

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केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार (अक्टूबर 8, 2020) को नई दिल्ली केे एस्कॉर्ट अस्पताल में निधन हो गया है। यह जानकारी उनके पुत्र और एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ट्वीट कर दी।

चिराग पासवान ने लिखा, “पापा… अब आप इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मुझे पता है आप जहाँ भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं। मिस यू पापा।” ट्वीट के साथ चिराग ने अपने बचपन की एक फोटो शेयर की। रामविलास पासवान इसमें उन्हें गले लगाए दिख रहे हैं।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री रामविलास पास कुछ समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में भर्ती थे। उनका 3 अक्टूबर की देर रात दिल का ऑपरेशन हुआ था। यह उनकी दूसरी हार्ट सर्जरी थी। इससे पहले भी उनकी एक बायपास सर्जरी हो चुकी थी।

चुनावों से पहले ही किसी पार्टी की लहर को पहचान लेने वाले व ‘मौसमी विज्ञानी’ कहे जाने वाले राम विलास पासवान सर्वप्रथम 1969 में विधायक चुने गए थे। वर्तमान में वह मोदी कैबिनेट में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री थे। उनकी आयु 74 वर्ष थी।

उनके निधन पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा है, “उनके निधन का दुख शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। उनके जाने से जो जगह खाली हुई है, उसे कोई नहीं भर सकता है। रामविलास पासवान जी का निधन मेरी निजी क्षति है। मैंने एक दोस्त, मूल्यवान सहयोगी और गरीबों के जीवन सम्मान से बीते ऐसा सुनिश्चित करने वाला शख्स खोया है।”

पीएम ने लिखा, “रामविलास पासवान कड़ी मेहनत और लगन से राजनीति में आगे बढ़े। एक युवा नेता के तौर पर उन्होंने इमर्जेंसी के दौरान जुल्म और हमारे लोकतंत्र पर हमले का विरोध किया। वह एक बेहतरीन सांसद, मंत्री थे।”

रामविलास पासवान का जन्म बिहार के खगड़िया जिले के शाहरबन्नी गाँव में हुआ था। उनकी पहली पत्नी राजकुमारी से उन्हें उषा और आशा नाम की दो बेटियाँ हैं। रामविलास पासवान 32 सालों में 11 चुनाव लड़ चुके हैं। उनमें से 9 जीत भी चुके हैं। उन्हें 6 प्रधानमंत्री के साथ काम करने का अनुभव था।

रामविलास पासवान के सियासी अनुभव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार से पहले ही सियासत में आ गए थे। 1977 के लोकसभा चुनाव में हाजीपुर से जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े पासवान ने चार लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कर रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद 2014 तक वे आठ बार आम चुनावों में जीते। फिलहाल वे राज्यसभा के सदस्य थे।

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