बिहार चुनाव: जूते-चप्पल, अंडे, मोबिल और पत्थर… सब खाने वाले कन्हैया कुमार को नहीं मिला टिकट

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राजद और कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर वाम दल बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। गठबंधन में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया है। लेकिन, इस सूची में भाकपा नेता कन्हैया कुमार का नाम नहीं है। बेगूसराय से लोकसभा चुनाव हार चुके कन्हैया के बछवाड़ा से विधानसभा चुनाव लड़ने की अटकलें थी।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को 6, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को 4 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (सीपीआई-एमएल) को 19 सीटें गठबंधन में मिली है। इनमें सीपीआई ने सभी 6 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है, सीपीएम ने भी अपने चार उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। माना जा रहा कि जल्द ही सीपीआई एमएल भी अपने कैंडिडेट्स के नाम का ऐलान कर देगा।

सीपीआई ने इन्हें दिया टिकट

सूर्यकांत पासवान को बेगूसराय की बखरी विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है। बेगूसराय की तेघड़ा से राम रतन सिंह, बछवाड़ा से अवधेश कुमार राय, मधुबनी की हरलाखी विधानसभा सीट से राम नरेश पांडेय, मधुबनी की झंझारपुर सीट से रामनारायण यादव, पूर्णिया की रूपौली सीट से विकास चंद्र मंडल उम्मीदवार बनाए गए हैं।

सीपीएम उम्मीदवारों की लिस्ट

सीपीएम ने जिन चार सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है उनमें समस्तीपुर की विभूतिपुर विधानसभा सीट से अजय कुमार उम्मीदवार होंगे। सारण की मांझी सीट पर सत्येंद्र यादव, पूर्वी चंपारण की पीपरा सीट से राजमंगल प्रसाद और बेगूसराय की मटिहानी सीट से राजेंद्र प्रसाद सिंह कैंडिडेट होंगे।

कन्हैया कुमार नहीं लड़ेंगे चुनाव

सीपीआई ने सभी 6 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए, इसमें कन्हैया कुमार का नाम नहीं है। ऐसे में उन अटकलों पर विराम लग गया कि कन्हैया कुमार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बन सकते हैं। कन्हैया कुमार 2019 लोकसभा चुनाव में सीपीआई के टिकट पर बेगूसराय सीट से उम्मीदवारी की थी, हालाँकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उनके विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा थी।

2020 के शुरू से ही कन्हैया कुमार बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर खासे एक्टिव रहे और अक्सर बताते रहे कि चुनावी मुद्दा क्या होने वाला है। कन्हैया कुमार CAA, NPR और NRC के विरोध में बिहार दौरे पर निकले थे और कई जगह उनको लोगों का विरोध भी झेलना पड़ा था। एक-दो जगह तो काफिले पर लोगों के हमले के बाद पुलिस को उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए मशक्कत करनी पड़ी थी। कुछ जगहों पर तो जूते-चप्पल, अंडे, मोबिल और पत्थर वगैरह भी चले थे। कुछ जगहों पर ‘कॉमरेड कन्हैया मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए गए।

कन्हैया कुमार जिन दिनों बिहार चुनाव को लेकर खासे तत्पर दिखाई दे रहे थे, फोर्ब्स मैगजीन ने दुनिया के टॉप-20 निर्णायक लोगों की एक सूची जारी की थी। सूची में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को अगले दशक का निर्णायक चेहरा बताया गया था। सूची में कन्हैया कुमार को 12वाँ स्थान दिया गया था।

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